सूरह इख्लास (112) हिंदी में | Al-Ikhlaas in Hindi

सूरह इख्लास “Al-Ikhlaas”

कहाँ नाज़िल हुई:मक्का
आयतें:4 verses
पारा:30

नाम रखने का कारण

‘अल्-इखलास’ इस सूरह का केवल नाम ही नहीं, बल्कि विषय-वस्तु की दृष्टि से इसका शीर्षक भी है, क्योंकि इसमें विशुद्ध एकेश्वरवाद का वर्णन किया गया है। कुरआन मजीद की अन्य सूरतों में तो साधारणतया किसी ऐसे शब्द को उनका नाम दिया गया है जो उनमें आया हो, किन्तु इस सूरह में ‘इख़लास’ (कैवल्य) शब्द नहीं आया। इसको यह नाम इसके अर्थ की दृष्टि से दिया गया है।

विषय और वार्ता

अवतरण की पृष्ठभूमि के विषय में जो उल्लेख ऊपर दिए गए हैं उन पर एक दृष्टि डालने से ज्ञात होता है कि जब अल्लाह के रसूल (सल्ल0) एकेश्वरवाद का आमंत्रण लेकर उठे थे तो उस समय संसार की धार्मिक धारणाएँ क्या थीं।

मूर्ति पूजने वाले बहुदेववादी उन कथित उपास्यों को पूज रहे थे जो लकड़ी, पत्थर, सोने, चाँदी आदि विभिन्न पदार्थों के बने हुए थे, रूप-रेखा और शरीर रखते थे। देवियों और देवताओं की विधिवत नस्ल चलती थी।

कोई देवी पति के बिना न थी और कोई देवता बिना पत्नी के न था। बहुदेववादियों की एक बड़ी संख्या इस बात को मानती थी कि ईश्वर मानव-रूप में प्रकट होता है और कुछ लोग उसके अवतार होते हैं।

ईसाई यद्यपि एक ईश्वर को मानने के दावेदार थे, किन्तु उनका ईश्वर भी कम-से-कम एक पुत्र तो रखता ही था और पिता-पुत्र के साथ प्रभुत्व में पवित्र आत्मा को भी भागीदार होने का श्रेय प्राप्त था।

यहाँ तक कि ईश्वर की माता भी होती थी और उसकी सास भी यहूदी भी एक ईश्वर को मानने का दावा करते थे, किन्तु उनका ईश्वर भी भौतिकता, शारीरिकता और दूसरे मानवीय गुणों से मुक्त न था।

वह टहलता था, मानव-रूप में प्रकट होता था और अपने किसी बन्दे से कुश्ती भी लड़ लेता था, और एक बेटे (उज़ैर) का पिता भी था। इन धार्मिक गिरोहों के अतिरिक्त मजूसी अग्निपूजक थे और साबिई नक्षत्रपूजक।

इस परिस्थिति में जब एक अल्लाह (जिसका कोई भागीदार नहीं), को मानने के लिए लोगों को आमंत्रित किया गया, तो उनके मन में इस प्रकार के प्रश्न पैदा होना अवश्यम्भावी था कि वह प्रभु है किस प्रकार का जिसे समस्त प्रभुओं और उपास्यों को त्याग कर अकेले एक हो। और उपास्य स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

उत्तमता और महत्त्व

अल्लाह के रसूल (सल्ल0) की दृष्टि में इस सूरह का बड़ा महत्त्व था। आप विभिन्न तरीकों से मुसलमानों को इसका महत्त्व महसूस कराते थे, ताकि वे अधिक से अधिक इसको पढ़ें और जनसामान्य में इसे फैलाएँ, क्योंकि यह इस्लाम की सर्वप्रदर मौलिक धारणा (एकेश्वरवाद) को चार ऐसे संक्षिप्त वाक्यों में व्यक्त कर देती है से तुरन्त मानव के मन में बैठ जाते हैं और सरलतापूर्वक ज़बानों पर चढ़ जाते हैं।

सूरह इख्लास (112) हिंदी में

अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान और रहम करने वाला है।

  • (1) कहो,’वह अल्लाह है एक, और अकेला है।’
  • (2) अल्लाह सर्व सम्पन्न है सबसे निरपेक्ष है और सब उसके मोहताज हैं।
  • (3) न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान।
  • (4) और कोई उसका समकक्ष नहीं है।

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