सूरह तब्बत (111) हिंदी में | Al-Masad in Hindi

सूरह तब्बत “Al-Masad”
कहाँ नाज़िल हुई:मक्का
आयतें:5 verses
पारा:30

नाम रखने का कारण

पहली ही आयत के शब्द ‘लहब’ को इस सूरह का नाम दिया गया है।

अवतरणकाल

इसके मक्की होने में तो टीकाकरों के मध्य कोई मतभेद नहीं है, किन्तु ठीक-ठीक यह निर्धारित करना कठिन है कि मक्का के किस कालखण्ड में यह अवतरित हुई थी।

अलबत्ता अबू लहब का जो आचरण अल्लाह के रसूल (सल्ल0) और आपके सत्य आह्वान के विरुद्ध था उसको देखते हुए यह अन्दाज़ा किया जा सकता है कि इस का अवतरण उस कालखण्ड में हुआ होगा जब वह नबी (सल्ल0) की शत्रुता में सीमा से आगे निकल गया था और उसकी नीति इस्लाम की राह में एक बड़ी रुकावट बन रही थी।

सूरह तब्बत (111) हिंदी में

अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान और रहम करने वाला है।

  • (1) टूट गए अबू लहब के हाथ और असफल हो गया वह
  • (2) उसका माल और जो कुछ उसने कमाया वह उसके किसी काम न आया
  • (3) ज़रूर वह भड़कती आग में डाला जाएगा।
  • (4) और (उसके साथ) उसकी जोरू भी लगाई बुझाई करने वाली
  • (5) उसकी गरदन में मूंज की रस्सी होगी।

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